Navratri 2016 Date History Story Vrat vidhi in Hindi

Navratri 2016 Date History Story Vrat vidhi in Hindi –

नवरात्र के नौ दिन देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र व्रत (Navratri Puja Vidhi) की शुरूआत प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से की जाती है। नवरात्र के नौ दिन प्रात: मध्याह्न और संध्या के समय भगवती दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। श्रद्धानुसार अष्टमी या नवमी के दिन हवन और कुमारी पूजा कर भगवती को प्रसन्न करना चाहिए।

Navratri 2016 Date History Story Vrat vidhi in Hindi

Navratri 2016 Date History Story Vrat vidhi in Hindi

Navratri 2016 Date

1 October 2016 से  10 October 2016 तक

इस वर्ष शारदीय नवरात्र 01 अक्टूबर 2016 से शुरु होंगे। और 10 अक्टूबर 2016 को संपन्न होंगे। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। 01 अक्टूबर को सुबह 06:17 मिनट से लेकर 07:29 तक का समय कलश स्थापना के लिए शुभ माना गया है। नवरात्र व्रत की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से की जाती है।

Navratri History in Hindi

नवरात्रि का इतिहास हिंदी में

एक पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर को उसकी उपासना से ख़ुश होकर देवताओं ने उसे अजेय होने का वरदान दे दिया था। उस वर को पाकर महिषासुर ने उसका दुरुपयोग करना शुरू कर दिया। और नरक को स्वर्ग के द्वार तक विस्तारित कर दिया। महिषासुर अपनी ईश शक्ति से ने सूर्य, इन्द्र, वायु, अग्नि, यम, चन्द्र, वरुण और अन्य देवतओं के भी अधिकार छीन स्वर्गलोक का मालिक बन बैठा।

देवताओं को महिषासुर के भय से पृथ्वी परअपना जीवन व्यतीत करना पड़ रहा था। तब महिषासुर के दुस्साहस से क्रोधित होकर देवताओं ने माँ दुर्गा की रचना की। महिषासुर का वध करने के लिए देवताओं ने अपने सभी अस्त्र-शस्त्र माँ दुर्गा को समर्पित कर दिए थे। जिससे वह बलवान हो गईं। नौ दिनों तक उनका महिषासुर से संग्राम चला था और अन्त में महिषासुर का वध करके माँ दुर्गा महिषासुरमर्दिनी कहलाईं।

Navratri 2016 Date History Story Vrat vidhi in Hindi

Navratri Story in Hindi

नवरात्री की कथा कहानी हिंदी में

आदि सतयुग के पराक्रमी राजा दक्ष की पुत्री सती माता को शक्ति भी कहा जाता है। हालांकि उनका नाम दक्षयानी था। दूसरे जन्म में पार्वती नाम इसलिए पड़ा की वह पर्वतराज अर्थात् पर्वतों के राजा की राजकुमारी पुत्री थी।

इस राजकुमारी ने अपने पिता की ‍इच्छा के विरुद्ध हिमालय के इलाके में ही रहने वाले योगी शिव से विवाह कर लिया। एक यज्ञ में जब दक्ष ने पार्वती (शक्ति) और शिव को न्यौता नहीं दिया। फिर भी सती शिव के मना करने के बावजूद अपने पिता के यज्ञ में पहुंच गई। लेकिन दक्ष ने शिव के विषय में सती के सामने ही अपमानजनक बातें कही। सती को यह सब अपमान सहन नहीं हुआ और उसने वहीं यज्ञ कुंड में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए।

यह खबर सुनते ही शिव ने अपने सेनापति वीरभद्र को भेजा, जिसने दक्ष का सिर काट दिया। इसके बाद दुखी होकर सती के शरीर को अपने कंधों पर धारण कर शिव ‍क्रोधित हो धरती पर घूमते रहे। इस दौरान जहां-जहां सती के शरीर के अंग या आभूषण गिरे वहां बाद में शक्तिपीठ निर्मित हो गए। जहां पर जो अंग या आभूषण गिरा उस शक्तिपीठ का नाम वह हो गया।

Navratri 2016 Date History Story Vrat vidhi in Hindi

Navratri Vrat vidhi in Hindi

नवरात्री व्रत पूजा विधि हिंदी में

नवरात्र के नौ दिन प्रात:, मध्याह्न और संध्या के समय भगवती दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। श्रद्धानुसार अष्टमी या नवमी के दिन हवन और कुमारी पूजा कर भगवती को प्रसन्न करना चाहिए।

नवरात्र में हवन और कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए। नारदपुराण के अनुसार हवन और कन्या पूजन के बिना नवरात्र की पूजा अधूरी मानी जाती है। साथ ही नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के लिए लाल रंग के फूलों व रंग का अत्यधिक प्रयोग करना चाहिए। नवरात्र में “श्री दुर्गा सप्तशती” का पाठ करने का प्रयास करना चाहिए।